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नया ईंमान


जल गया सब कुछ ख़ाक हो गया
आँखों में आँसू तमाम हो गया।

तलवारें नग्न हो गईं बदुंखें आग थूक दीं
देखते देखते कूंचा-ए-शहर शमशान हो गया।  

उतर गई इंसानियत की कमीज़ दिल-ए-दिल्ली
अब दंगे में सबका नया ईंमान हो गया।

ठहर गये सब अपने अपने घर गये सब
कुछ रह गया तो बस आँखो में मलाल रह गया।


ये किस की नज़र लग गई जीव बदनाम हो गया  
देख लो अब सियासत का नया रुआब रह गया। 


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