आज यह सोच कर तेरे श़हर को आया था कि तुम पहले से कहीं ज़ियादा बदल गई होगी, शायद मेरे जज़बात मे बहनें के काबिल हो गई होगी या फिर अपना रकीब समझ मानने लगी होगी लेकिन ये सब महज़ एक भरम था ....... जीव
बस यूं ही,..... कुछ खास नहीं बस यूं ही.... सुखद एहसास नहीं बस यूं ही... दिल की भड़ास नहीं बस यूं ही... कोई खास आवाज़ नहीं बस यूं ही... तेरे प्यार की किताब नहीं बस यूं ही... मैं तेरे पास नहीं बस यूं ही... कुछ बवाल नहीं बस यूं ही... जगती हुई कोई रात नहीं बस यूं ही......कहानियों की इतिहास नहीं बस यूं ही... कविताओं की प्यार नहीं बस यूं ही.... तेरे सवालों की जवाब नहीं बस यूं ही.... खैर छोड़ो ये दिल की दुकान नहीं बस यूं ही......