मैं निःशब्द हूं , मैं निःशब्दता का पर्याय हूं मैं मौन हूं किन्तु मौनत मेरी कायरता नहीं गर! तुम्हे लगता है की कमजोर हूँ तो सुनो, मेरे शब्द जब उठेंगे सवलों पे कई सवल उठेंगे तब तुम्हें मेरे मनुभाओ समझ आयेंगे पथ पे हारे मजदूर जैसा मनुभाओ जो है वो निराला के कलम जैसा वही इलाहाबाद के पथ पे बैठे मजदूर जैसा वही निरह सबकुछ देने वाला भिछुक जैसा मैं कृष्ण नहीं बलराम हूं मैं भार्गव नहीं मैं राम हूं मैं हारता मैं जीतता मैं जीव का सार हूं मैं निःशब्द हूं , मैं निःशब्दता का पर्याय हूं जीव
बस यूं ही,..... कुछ खास नहीं बस यूं ही.... सुखद एहसास नहीं बस यूं ही... दिल की भड़ास नहीं बस यूं ही... कोई खास आवाज़ नहीं बस यूं ही... तेरे प्यार की किताब नहीं बस यूं ही... मैं तेरे पास नहीं बस यूं ही... कुछ बवाल नहीं बस यूं ही... जगती हुई कोई रात नहीं बस यूं ही......कहानियों की इतिहास नहीं बस यूं ही... कविताओं की प्यार नहीं बस यूं ही.... तेरे सवालों की जवाब नहीं बस यूं ही.... खैर छोड़ो ये दिल की दुकान नहीं बस यूं ही......