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Showing posts from 2021

मैं

  मैं निःशब्द हूं , मैं निःशब्दता का पर्याय हूं मैं मौन हूं किन्तु मौनत मेरी कायरता नहीं गर! तुम्हे लगता है  की  कमजोर हूँ तो सुनो, मेरे शब्द जब उठेंगे  सवलों पे कई सवल उठेंगे तब तुम्हें मेरे मनुभाओ समझ आयेंगे   पथ पे हारे मजदूर जैसा मनुभाओ जो है  वो  निराला के कलम  जैसा    वही इलाहाबाद के पथ पे बैठे मजदूर  जैसा  वही निरह सबकुछ देने वाला भिछुक  जैसा  मैं कृष्ण नहीं बलराम हूं मैं भार्गव नहीं मैं राम हूं मैं हारता मैं जीतता मैं जीव का सार हूं मैं निःशब्द हूं , मैं निःशब्दता का पर्याय हूं                                             जीव

स्त्री तेरी जिंन्दाबाद हो...

तुम कहो तो कुछ कह दें या फिर यूं ही रहने दें तुम ज़न हो तुम स्त्री हो तुम सब जानती हो तुम से ब्रह्मान्ड है तुम से ही जीवन का मूल है  तुम नारत्व की परिभाषा हो   अरे तुम तो मनोभाव भी पढ़ती हो फिर क्यूं लफ़्जों की ये डर तुम में हो आओ कह दें, ख़ामोशियों को तोड़ दें दर्द जो भी हो धूप की चादर में ओढ़ लें और फिर कह दें  स्त्री तेरी जिंन्दाबाद हो....