रोशन हुआ शब जो तुम आये उम्म्दि-ए-इश्क जो तुम लाये। दिल ये मिरा बच्चा हुआ जाता अच्छा है की खिलौना तुम लाये। दिल दुखता उसके जाने के पर अच्छा है की मरहम तुम लाये। शाम हो गई वो अपने घर चले अल्लाह करम,की जुगनू तुम लाये। उदाशियाँ बाँधता “ जीव ” उसके जाने पर चलो खु़शी का एक पल तो तुम लाये।
बस यूं ही,..... कुछ खास नहीं बस यूं ही.... सुखद एहसास नहीं बस यूं ही... दिल की भड़ास नहीं बस यूं ही... कोई खास आवाज़ नहीं बस यूं ही... तेरे प्यार की किताब नहीं बस यूं ही... मैं तेरे पास नहीं बस यूं ही... कुछ बवाल नहीं बस यूं ही... जगती हुई कोई रात नहीं बस यूं ही......कहानियों की इतिहास नहीं बस यूं ही... कविताओं की प्यार नहीं बस यूं ही.... तेरे सवालों की जवाब नहीं बस यूं ही.... खैर छोड़ो ये दिल की दुकान नहीं बस यूं ही......