रोशन हुआ शब जो तुम आये
उम्म्दि-ए-इश्क जो तुम लाये।
दिल ये मिरा बच्चा हुआ जाता
अच्छा है की खिलौना तुम
लाये।
दिल दुखता उसके जाने के पर
अच्छा है की मरहम तुम लाये।
शाम हो गई वो अपने घर चले
अल्लाह करम,की जुगनू तुम लाये।
उदाशियाँ बाँधता “जीव” उसके जाने पर
चलो खु़शी का एक पल तो तुम लाये।
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