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वज़ूद

        
एक तन्हाई एक शोर पर खड़ा मौज़ू,
एक आज़ादी एक गुलामी की शोक,
एक ख़्वाईशो की निन्द एक छन्न् करते सपनों के जेब,
सबके अपने वज़ूद सबके अपने सबब
सच कहता हूँ जीव तुम्हारी यही ज़िन्दगी है।

एक चाहत एक अनमना सा दिल,
एक रुदाद एक हकीकत,
एक आँखो मे छायी उदासी एक मन् में उठी मादक खुशबु,
सबके अपने वज़ूद सबके अपने सबब
सच कहता हूँ जीव तुम्हारी यही ज़िन्दगी है।
                                      .....जीव

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