बात जो मन की रही
किस को सुनाता गीत बन
झेलम तुम्ही गा के बताना
मेरे ह्रदय की संवेदना।।
कैसी जली ये अग्नि कुण्ड
जो भयावह द्श्य बन
लो खा गय सबको यहाँ
ज़िहाद की अवचेतना।।
अब उठेगा किस किस से
ये जो मौत का मलबा पड़ा
क़ुरान-शरीफ़ सबको बताना
खुदा के ह्रदय की वेदना।।
उठो तुम्हीं ज़िहाद करना
पर नाम ख़ुदा का छोड़ कर
मौत से रिश्ता तुम्हारा
तुम्हीं सुनों अब ये क्रन्दना।।

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