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Showing posts from April, 2021

मैं

  मैं निःशब्द हूं , मैं निःशब्दता का पर्याय हूं मैं मौन हूं किन्तु मौनत मेरी कायरता नहीं गर! तुम्हे लगता है  की  कमजोर हूँ तो सुनो, मेरे शब्द जब उठेंगे  सवलों पे कई सवल उठेंगे तब तुम्हें मेरे मनुभाओ समझ आयेंगे   पथ पे हारे मजदूर जैसा मनुभाओ जो है  वो  निराला के कलम  जैसा    वही इलाहाबाद के पथ पे बैठे मजदूर  जैसा  वही निरह सबकुछ देने वाला भिछुक  जैसा  मैं कृष्ण नहीं बलराम हूं मैं भार्गव नहीं मैं राम हूं मैं हारता मैं जीतता मैं जीव का सार हूं मैं निःशब्द हूं , मैं निःशब्दता का पर्याय हूं                                             जीव