पिता का होना सुख है पिता का न होना दुःख शेष इन दोनो के मध्य कुछ है, वही आज स्मृति शेष । पिता अंबर है, पिता समंदर है, पिता धूप में वृक्ष छायादार है। पिता वही है, जिसके आने की राह हम देखते है पिता वही है, जिसके कंधे से दुनिया हम देखते है पिता राह है, पिता आदर्श है, पिता संसार है पिता है तो सबकुछ है पिता नही है, तो कुछ भी नहीं शेष है।
बस यूं ही,..... कुछ खास नहीं बस यूं ही.... सुखद एहसास नहीं बस यूं ही... दिल की भड़ास नहीं बस यूं ही... कोई खास आवाज़ नहीं बस यूं ही... तेरे प्यार की किताब नहीं बस यूं ही... मैं तेरे पास नहीं बस यूं ही... कुछ बवाल नहीं बस यूं ही... जगती हुई कोई रात नहीं बस यूं ही......कहानियों की इतिहास नहीं बस यूं ही... कविताओं की प्यार नहीं बस यूं ही.... तेरे सवालों की जवाब नहीं बस यूं ही.... खैर छोड़ो ये दिल की दुकान नहीं बस यूं ही......