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Showing posts from 2017
एक नीम का पेड़.... जिसके नीचे मेरा बचपन खेला था, जिसके नीचे मैंने पहली बार बोला था, जिसके नीचे  मैं पहली बार चला था, जो मेरे सुख दुःख का दर्पण था, वो अब मेरे घर के सामने नहीं..... क्योकि वो निर्लज्ज पेड़, सबके घर की शोभा बीगाड़ती थी                                                               जीव

ज़िहाद

बात जो मन की रही किस को सुनाता गीत बन झेलम तुम्ही गा के बताना मेरे ह्रदय की संवेदना।। कैसी जली ये अग्नि कुण्ड जो भयावह द्श्य बन लो खा गय सबको यहाँ ज़िहाद की अवचेतना।। अब उठेगा किस किस से ये जो मौत का मलबा पड़ा क़ुरान-शरीफ़ सबको बताना खुदा के ह्रदय की वेदना।। उठो तुम्हीं ज़िहाद करना पर नाम ख़ुदा का छोड़ कर मौत से रिश्ता तुम्हारा    तुम्हीं सु नों अब ये क्रन्दना।।   

वज़ूद

         एक तन्हाई एक शोर पर खड़ा मौज़ू, एक आज़ादी एक गुलामी की शोक, एक ख़्वाईशो की निन्द एक छन्न् करते सपनों के जेब, सबके अपने वज़ूद सबके अपने सबब सच कहता हूँ जीव तुम्हारी यही ज़िन्दगी है। एक चाहत एक अनमना सा दिल, एक रुदाद एक हकीकत, एक आँखो मे छायी उदासी एक मन् में उठी मादक खुशबु, सबके अपने वज़ूद सबके अपने सबब सच कहता हूँ जीव तुम्हारी यही ज़िन्दगी है।                                        .....जीव

मेरे पिता

एक दुर्बल माँस का मानस, जिसका एक अंश मै भी हूँ जो कुछ काल पूर्व तक मेरे साथ था किन्तु अब वो मेरे पास नहीं।  ....जीव