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Showing posts from May, 2015

तिरे ख़ातिर

कितने रोज़े कितने बरस गुजरें तुम बिन ये तुम क्या जानो... तुम नहीं हो   फिर भी दिल बहजत है तुम बिन ये तुम क्या जानो... कुछ बेचैनियाँ कुछ करार है दिल में तुम बिन ये तुम क्या जानो... कोई वहशत है दिल में तुम बिन ये तुम क्या जानो... कई सवालों के सैलाब दिल मे है तुम बिन ये तुम क्या जानो... यह जीव जिंदा हैं दयर-ओ-हरम में तुम बिन ये तुम क्या जानो...                                                                                                                                    ...जीव