ज़ुरअत-ओ-ग़ैरत से मिरा तब-ओ-ताब(1) है
शहर-ए-दिल्ली में NRC का इन्क़लाब
है
चुप रहती है सरकारें इन्फ़िकाक(2) बातों पर
गंगा जमुनी तहजीब में आखिर क्यूं अन्साब(3) है
शहर बदनाम न हो गर हिन्दुं मुस्लमान न हो
मना लो होली-ईंद इसबार ये नया आफ़ताब है
क्यू नहीं समझती सरकारें हालत-ए-मुल्क को
ख़सो-ख़ाशाक(4) पे मुल्क़ की अभी आब-ओ-ताब(5) है
शहरे-ए-दिल्ली में “जीव” नया नज़राना लाया
फ़स्ल-ए-गुल(6) में चलता अब ये नया कारोबार है
1-कोल्हाल युक्त चकाचौंध, 2-अलगाव,3- जातियाँ 4-घास फूस, 5-चमक दमक,6-बंसत को मौसम
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