कुछ उम्मिदों का कारवाँ
लिये,
जो जहाँ जीतने आया था।
दुनियाँ के नये परपंचो
पे,
जो नया संवाद रचने आया
था।
बंजर सी धूमिल ह्रिदय पे,
जो फसल उगाने आया
था।
भुजावों में सहस्रों का बल लिये,
जो सहस्रबाहु बनकर आया था।
उस जीव का हौसला अब तूटता है
जो कृष्ण के नीति बाचने आया था,
जो जहाँ मे बुद्ध की रीत
जगाने आया था,
जो गाँधी के विचारों पे
नया संर्घस लिखने आया था
वो उम्मिदों का कारवाँ लिये,
जो जहाँ जीतने आया था।.............जीव
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