मैं जाऊँ तो कहाँ जाऊँ
इस वीरान से शहर से
कोई मिलता नहीं
ईमान का इस शहर से
मैं वो जीव हूँ इस शहर का
ये सिर्फ मैं जानता हूँ,
यहाँ बदहवाली पनपती है
पुरपेच से गलियारे यहाँ बू मारती है
किस-किस को रूदाद-ए-शहर बयां करू
“यहाँ” हर
किसी में अब सड़धं की बू मारती है
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