फिर चलो शहर में
हंगमा कर दे
फिर कोई रूह लायें
उसे जिन्दा कर दे
येही तो शौक है शहर
के
येही तो है मिज़ाज
शियसत के
चलो उठो फिर शहर में
दंगा कर दे
वो कौन हैं जिन्हें
इन्शान का दर्जा दे
वो लाश सी पड़ी जिन्दगी
उसे शिज्दा दे
वो कामगर जो वहाँ बैठा है
वो चने वाला जो वहाँ
सोया है
चलो उठाओं मशाल सब
धुआ-धुआ कर दें
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