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आखिर क्यूं?

              

             









आखिर क्यूं?

बार-बार जाने किस विषय को कंठस्थ कर रहा था
यह समझ से परे था मुझसे और मेरे स्मृतियों से
किन्तु फिर भी इसी राग को पिरोने मे लगा था
आखरी वो  कौन सी हवस थी,
जिसको जीव एक बार फिर पाना चाहता था
आखिर वो  कौन सा प्यार था ,
जीसमे पतंगे की तरह वो जलना चाहता था
आखिर क्यूं?
अपने धर्म को छोड़ दूसरे पथ पे चलना चाहता था......जीव









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